Repo rate meaning in hindi रेपो रेट क्या है ?

Repo rate meaning in hindi रेपो रेट क्या है ?

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Repo rate Kya Hai?- आरबीआई (Reserve Bank of India) जिस रेट पर Commercial banks और other banks को लोन देता है उसे रेपो रेट (Repo rate) कहा जाता है।  रेपो रेट कम होने से  बैंको से मिलने वाले सभी तरह के लोन सस्ते हो जाते है और अगर  रेपो रेट ज्यादा हो जाता है तब बैंक से मिलने वाले लोन ज्यादा  Interest Rate से मिलेंगे।

Simple शब्दों में कहे तो जब हमें पैसे की जरूरत  होती है तब हमें बैंक से कर्ज लेना पड़ता है।  इसके बदले में  हम बैंक को ब्याज चुकाते हैं।  इसी तरह बैंक को भी लोन देने के लिए काफी रकम की जरूरत पड़ती है। तब  Commercial banks या छोटे बैंक भारतीय रिजर्व बैंक से कर्ज लेते हैं। अब भारतीय रिजर्व बैंक, बैंको को जिस Interest Rate पर लोन देती है उसे  उसे रेपो रेट कहा जाता है। 

Interest rate क्या है? (ऋण ब्याज क्या होता है)- 
Interest rate  वह Amount है जिसे आप एक ऋण का Ratio जिसे उधारकर्ता (borrower) से ब्याज के रूप में लिया जाता है Interest rate कहलाता है। 

ब्याज दर  वार्षिक आधार पर नोट की जाती है जिसे वार्षिक प्रतिशत दर (Annual Percentage Rate-APR) के रूप में जाना जाता है। उधार दिए गए धन के उपयोग के लिए  या किसी ऋण की payment में देरी के लिए एक special rate पर नियमित रूप से भुगतान किया गया धन Interest Rate (ब्याज दर) होता है।

SBI Personal Loan Interest rate कितना है -

***Loan Type- Personal Loan

-Interest Rate - [9.60% p.a. - 15.65% p.a. ]
-Loan Amount - [Up to Rs.20 lakh]
-Minimum Income Required - [Rs.15,000 / Month]
-Loan Tenure  Up to 6 years-

कुछ दूसरी Banks के Personal Loan Interest rateहै -

*ICICI Bank  [11.25% p.a. - 21% p.a. ]

*HDFC Bank  [10.75% p.a. - 21.30% p.a.]

*Yes Bank  [13.99% p.a. - 16.99% p.a.]

*Citibank  [10.50% p.a. - 17.99% p.a.]

*Kotak Mahindra Bank  [10.50% and above]

*Axis Bank  [12% p.a. - 24% p.a.]


Loan किसे कहते है ?
जब कोई ऋणदाता (उधार देनेवाला) किसी व्यक्ति  को एक sure guarantee के साथ या इस विश्वास के आधार पर लोन देता है कि प्राप्तकर्ता (उधार दलेनेवाला) उधार के पैसे को कुछ अतिरिक्त लाभों के साथ चुकाएगा, जैसे कि Rate of interest process को उधार देना या ऋण-loan  लेना कहा जाता है।

एक loan के तीन component होते हैं -
 ( principal or loan amount ) मूलधन या उधार राशि, ब्याज दर (Rate of interest ) और अवधि या अवधि (Period) जिसके लिए ऋण लिया जाता है। हम में से अधिकांश लोग बैंक या किसी reliable non-banking financial company से पैसा उधार लेना पसंद करते हैं क्योंकि वे government policies से बंधे होते हैं और भरोसेमंद होते हैं।

Loan के प्रकार-
Loan के  कई प्रकार है जैसे 

*Secured loan
*Unsecured loan
*Education loan
*Personal loan
*Vehicle loan  
(Two-Wheeler Loans, four Wheeler Loans )
*Home Loan
*Gold loan
*Loan against property
*Personal Loans
*Credit Card Loans
*Small Business Loans etc....

Personal Loans  क्या है ?
Personal Loans- loan चाहे  आप अपना खुद का बिज़नेस शुरू करने के लिए ले , कोई भी सामान खरीदने के ले , word के कही भी घूमने जाने के लिए , shopping के लिए , इत्यादि यह सभी पर्सनल लोन कहलाते है। आप किसी भी मोबाइल एप्लीकेशन या किसी भी बैंक से लोन ले सबका अलग अलग interest rate होता है।

(Tenure) ऋण अवधि क्या है कितने समय  के लिए loan मिलता है?-
यह वह समय है जिसके लिए एक financial institution loan amount को मंजूरी देता है और जिसके दौरान उधारकर्ता ब्याज सहित ऋण चुकाने के लिए उत्तरदायी होता है। 

उधारकर्ता पूरे कार्यकाल के दौरान ईएमआई (EMI)के रूप में ऋण चुकाते हैं। लोन की  समय (tenure) अवधि 3 महीने से 07 Years के बीच की है। Tenure Depend करता है की आप किस type का लोन लेना चाहते है। जैसे कार लोन Tenure 12 से 60 महीने तक हो सकती है। कुछ बैंक नई कारों के लिए 7 साल तक की अवधि के साथ कार ऋण प्रदान करते हैं।

ईएमआई क्या है ? what is emi? 
EMI का फुल फॉर्म Equated Monthly Installment  होता है इसे हिंदी में मासिक किस्त कहते है। (EMI ) मासिक किस्त एक निश्चित भुगतान राशि है जो एक उधारकर्ता (Loan लेने वाला) द्वारा प्रत्येक महीने में एक निश्चित तारीख को Loan लेने वाले से ली जाती है।

लोन लेने से पहले आप इन बातो का जरूर ध्यान रखे -
हर आदमी को कभी न कभी लोन लेने की जरुरत जरूर पड़ती है, अपनी जरुरत के हिसाब से लोन छोड़ा या बड़ा हो सकता है जैसे हमें गाडी या घर खरीदने के लिए अपना खुद का business शुरू करने के लिए  हमें बैंक से लोन लेने की जरुरत पड़ती है और अचानक किसी छोटे खर्चे के आ जाने पर हम अपने दोस्त रिस्तेदार से पैसे उधार लेते है। 

इस तरह से लोन छोटा हो या बड़ा इसकी जरुरत समय समय पर हर किसी को पड़ती है। लेकिन अगर आप लोन लेने से पहले आप इन बातो का जरूर ध्यान रखे। अगर आप इन बातो  में ध्यान में रखकर रखकर लोन लेते है तो आप फ्यूचर में कभी भी कर्ज के जाल में नहीं फसेंगे। 

Importact fact No.01- लोन किसी भी तरह से लीजिये लेकिन इतना ध्यान जरूर रखिये की ये  अमाउंट आपकी कर्ज चुकाने की कैपेसिटी के हिसाब से होना चाहिए मतलब आप अपनी रेगुलर इनकम से पैसा बचाकर लोन की रकम एक निश्चित समय में चुका पाने में capable होने चाहिए। 

आपके कुल लोन की मासिक किस्त आप की मासिक आय के 30 % से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, अगर आप 40 से 50 हजार महीना कमाते है तो आपके लोन की emi  लगभग 12000 से 15000  से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।  अगर आप इससे ज्यादा emi भरते है तो आपको फ्यूचर में दिग्गत या  आपके फ्यूचर की प्लानिंग में दिग्गत हो सकती है।

Importact fact No.02-  ईएमआई फिक्स टाइम पर दीजिए इस बात का जरूर ध्यान रखिए कि लोन चाहे छोटे समय के लिए हो जैसे क्रेडिट कार्ड का बिल या फिर लंबे समय के लिए हो जैसे कार लोन, business loan लोन का भुगतान आप हमेशा समय पर ही करिए,  अगर आप emi देने से चूक जाते हैं  तो इसका सीधा असर आपके क्रेडिट प्रोफाइल पर पड़ता है जिसकी वजह से फ्यूचर में लोन पाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। 

Importact fact No.03-लोन चुकाने का समय जितना लंबा होता है उतना ही ज्यादा अमाउंट आप को लोन के भुगतान में चुकाना पड़ता है।  लोन चुकाने का समय जितना छोटा होता है उतना ही अच्छा होता है, लोन चुकाने का टाइम पीरियड बढ़ाने पर emi का अमाउंट कम हो जाता है लेकिन टोटल लोन का अकाउंट बढ़ जाता है। 

Importact fact No.04-बड़े अमाउंट वाले लोन के साथ इंश्योरेंस जरूर लेना चाहिए अगर आप होम लोन या कार लोन या फिर बिज़नेस लोन  जैसा कोई बड़ा loan लेते हैं तो साथ में इंश्योरेंस लेना चाहिए। 

क्योकि अगर आपको कुछ हो जाता है और आप पर डिपेंड लोग उस अमाउंट को नहीं चूका  पाते हैं तो लोन  देने वाला आपके पैसे इंश्योरेंस  से ले लेता है। term-plan लेने से आपकी नामौजूदगी में घर वालों को बड़े अमाउंट वाले लोन की emi को चुकाना नहीं  पड़ेगा। 

तो अगर आप इन पॉइंट को ध्यान में रख कर loan लेते है तो आप कभी भी कर्ज के जाल में नहीं फसेंगे।



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